दिन दिन करके ज़िंदगी धक रही है…
मुँह पर कपड़ा डाल दिल में घुटन सी हो रही है…
हालातों के शिकंजे में इस कदर आ खड़े है…
बेचैनी के मानो पहरे लग रहे है…
सवाँरा हुआ कल पीछे खड़ा था, मगर हम तबाही का मंज़र चुन रहे है…
लगता है, कायनात से रोज़ बिछड़े पल की भीख मांग रहे है…
सब ठीक होने की आस में हर वक्त से लड़ रहे है…
जीवन की इस लड़ाई में सब अकेले से पड़ रहे है…!!
:-प्रथमेष 🖋
प्यारा!
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Thank u ❣️
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It’s Admirable…:)
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Thank u❣️keep supporting💯
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