🌚

कितनी काली होती हैं ये उजली रातें…पूछ जाकर उनसे जिनके घर पर छत नहीं होती… सुबह का सवेरा तू क्या देखेगा…तेरी तो उनकी तरह धूप से रूबरू बात भी नहीं होती…!! :-प्रथमेष 🖋

हालात…

दिन दिन करके ज़िंदगी धक रही है…मुँह पर कपड़ा डाल दिल में घुटन सी हो रही है… हालातों के शिकंजे में इस कदर आ खड़े है…बेचैनी के मानो पहरे लग रहे है… सवाँरा हुआ कल पीछे खड़ा था, मगर हम तबाही का मंज़र चुन रहे है…लगता है, कायनात से रोज़ बिछड़े पल की भीख मांगContinue reading “हालात…”

हार का वो सफर..🛤

गुज़रती हवा में वो खुशबू नहीं थी… ज़िंदगी गुमसुम सी बस एक मोड़ पर खड़ी थी… झूठी मुस्कान उस चेहरे पर ज़रुर आती थी… मगर दिल में अजीब सी मायूसी फिर से छा जाती थी… नकामयाबी का वो मंज़र इस कदर आ खड़ा था… उस दौर में हार से भी हारा हुआ लगने लगा था…Continue reading “हार का वो सफर..🛤”

Create your website with WordPress.com
Get started