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कितनी काली होती हैं ये उजली रातें…पूछ जाकर उनसे जिनके घर पर छत नहीं होती… सुबह का सवेरा तू क्या देखेगा…तेरी तो उनकी तरह धूप से रूबरू बात भी नहीं होती…!! :-प्रथमेष 🖋

वो क्या है कि मैं रोता नहीं हूँ…

वो क्या है कि मैं रोता नहीं…आंसूओ को समेट कर समंदर बना रहा हूँ… लोगों को मैं थोड़ा बेपरवाह नज़र आ रहा हूँ…इस किराय की हँसी से ज़िंदगी की हार छुपा रहा हूँ… वो क्या है कि मैं लाचार नहीं बन पा रहा हूँ…आंसूओ से कमाई भीड़ का हकदार नहीं बनना चाह रहा हूँ… मेरीContinue reading “वो क्या है कि मैं रोता नहीं हूँ…”

…!!

मैं बोलता नहीं सिर्फ़ शब्द लिखता हूँ…मिठास से थोड़ा इसीलिए फासला सा रखता हूँ… कि कहीं ज़िंदगी मिठाई की तरह दाढ़ में चिपक न जाए…कड़वी ही सही, कोई दवा समझकर निगल ही जाए…!! :-प्रथमेष 🖋

वो गर्म चाय ☕

गली के चौराहे पर एक महफिल सज रही थी…गर्म आँच पर अदरक वाली चाय उबल रही थी… लबों पर गरमाहट और दिल को राहत पहुँचा रही थी…वो गर्म चाय आते जाते लोगों को अपने करीब बुला रही थी… अनजान लोगों को एक मुक़ाम पर जानकार बना रही थी…वो चाय की टपरी हम दोस्तों का रोजContinue reading “वो गर्म चाय ☕”

क्या ?

शब्द न समझ सके तो…चुप्पी क्या पड़ सकोगे तुम… इस अजीब से रवैये से…क्या मुझे हरा सकोगे तुम… बेपनाह ज़िंदगी के इन आवारा सपनों को…क्या पूरे कर सकोगे तुम… इस उबाल खाती गर्म मंज़िल को…क्या अपने कोरे हाथों से छू सकोगे तुम… समंदर की उन लहरों को भी अभिमान है खुदपर…क्या अपनी कश्ती को उसContinue reading “क्या ?”

अपनी ज़िंदगी…

आँखो से सोचना बंद करोगे तो दिमाग कि अहमियत पता चलेगी… अपने दिल को जोड़ कर रखोगे तभी तो उसकी धड़कन सुनाई देगी… माँ से कभी खाना खाया ये पूछ कर देखना उसके कलेजे को भी ठंडक पहुँचेगी…अपनी इज्ज़त से जीवन को खुद के उसूलों से जीना , ज़िंदगी और भी हसीन लगने लगेगी… दुनियाContinue reading “अपनी ज़िंदगी…”

बदलाव

लोग बदले , हालात बदले…मगर मेरे जीने के अंदाज़ न बदले… कहावत को हकिकत में बदला…ज़माने को आईना दिखाया मगर कभी खुदका हुलिया न बदला… मंज़िल भी नहीं बदली , रास्ता भी न बदला…हम चलने वाले ने अपना जज़्बा भी न बदला… था शौक ए कदर इस कदर ज़िंदगी का मुझ पर…के अरसो से मंज़िलContinue reading “बदलाव”

रात 🌃

ये रातें बहुत कुछ बता देती है…इसी लिए मुझे छोड़ सभी को सुला देती है… चाँद सितारों से रोज़ वो महफिल सजती है…कुछ अनकही बातें भी बेख़ौफ लफ्ज़ो में निकलने लगती है… कई लोगों के गिला शिकवा समेट कर अपने साथ ले जाती है…जाते जाते नींद में सुबह के हसीन सपने दिखा जाती है… सभीContinue reading “रात 🌃”

ज़रूरी है या नहीं…

कामयाबी हर किसी को पचती नहीं…हकिकत छुप जाती है,मगर बदलती नहीं… कोई रोके तो थम जाऊ , खड़ा हो तो झुक जाऊ…क्या करू ऐसा तो मेरी फ़ितरत में नहीं… रोकने वाले हज़ार हाथ को काटना के लिए शाहजहाँ बनना तो मजबूरी है…सहारा देने वालो के लिए एकलव्य बनना भी ज़रूरी है… ये ज़रूरी तो नहींContinue reading “ज़रूरी है या नहीं…”

पैसा…

पैसे से अगर दुनिया चलती…तो हर रोज हर पल तकदीर बदलती… कई लोगों ने ईमान तोल दिया पैसों पर…मैने उन्हें छोड़ दिया उसी वक्त, उसी हाल पर… भरी होगी उनकी जेब पैसों से…मेरा नसीब भरा है , मेरे दोस्तों से… कहाँ ले जायेंगे उस पैसे के गुरूर को…न कफन में जेब है, न कब्र मेंContinue reading “पैसा…”

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