वो क्या है कि मैं रोता नहीं हूँ…

वो क्या है कि मैं रोता नहीं…
आंसूओ को समेट कर समंदर बना रहा हूँ…

लोगों को मैं थोड़ा बेपरवाह नज़र आ रहा हूँ…
इस किराय की हँसी से ज़िंदगी की हार छुपा रहा हूँ…

वो क्या है कि मैं लाचार नहीं बन पा रहा हूँ…
आंसूओ से कमाई भीड़ का हकदार नहीं बनना चाह रहा हूँ…

मेरी इस हँसी पर चल रहे मुकदमें रोज़ हार रहा हूँ…
मैं आंसू पर इलज़ाम नहीं, इस भाड़े की हँसी का इंसाफ माँग रहा हूँ…

वक्त रहते इस झूठी हँसी के पीछे की वजह जान लेना…
एक अरसे से उन बूंदों को अपने अंदर समेटता आ रहा हूँ…

वो क्या है कि मैं रोया नहीं बस समय हँसकर गुजा़र रहा हूँ…

:-प्रथमेष 🖋

…!!

मैं बोलता नहीं सिर्फ़ शब्द लिखता हूँ…
मिठास से थोड़ा इसीलिए फासला सा रखता हूँ…

कि कहीं ज़िंदगी मिठाई की तरह दाढ़ में चिपक न जाए…
कड़वी ही सही, कोई दवा समझकर निगल ही जाए…!!

:-प्रथमेष 🖋

वो गर्म चाय ☕

गली के चौराहे पर एक महफिल सज रही थी…
गर्म आँच पर अदरक वाली चाय उबल रही थी…

लबों पर गरमाहट और दिल को राहत पहुँचा रही थी…
वो गर्म चाय आते जाते लोगों को अपने करीब बुला रही थी…

अनजान लोगों को एक मुक़ाम पर जानकार बना रही थी…
वो चाय की टपरी हम दोस्तों का रोज का अड्डा बनते जा रही थी…

पत्ती से कड़वे और शक्कर से मीठे सारे सूख दुख बाहर ला रही थी…
वो गर्म कुल्हड़ की खुशबू उस शाम में एक समा सा बांधते जा रही थी…!!

:-प्रथमेष 🖋

क्या ?

शब्द न समझ सके तो…
चुप्पी क्या पड़ सकोगे तुम…

इस अजीब से रवैये से…
क्या मुझे हरा सकोगे तुम…

बेपनाह ज़िंदगी के इन आवारा सपनों को…
क्या पूरे कर सकोगे तुम…

इस उबाल खाती गर्म मंज़िल को…
क्या अपने कोरे हाथों से छू सकोगे तुम…

समंदर की उन लहरों को भी अभिमान है खुदपर…
क्या अपनी कश्ती को उस दरिया में बहा सकोगे तुम… ?!

:-प्रथमेष 🖋

STORY OR THEORY…

Make Rules at your own circumstances…
Do amendments according to the society preferences…

Draft your life as a story or theory…
Your own people will kill you to achieve the glory…

Show your tears only to the mirror…
You yourself are stronger enough to trigger…

Find your own way to overcome…
Believe that your story or theory will inspire everyone…

:-PRATHMESH 🖋

अपनी ज़िंदगी…

आँखो से सोचना बंद करोगे तो दिमाग कि अहमियत पता चलेगी…
अपने दिल को जोड़ कर रखोगे तभी तो उसकी धड़कन सुनाई देगी…

माँ से कभी खाना खाया ये पूछ कर देखना उसके कलेजे को भी ठंडक पहुँचेगी…
अपनी इज्ज़त से जीवन को खुद के उसूलों से जीना , ज़िंदगी और भी हसीन लगने लगेगी…

दुनिया के दम पर गुज़ारी हुई जिंदगी, किसी दिन दुनिया ही तुझसे छीन लेगी…
अपनी कमाई हुई सूखी रोटी खाकर देखना , तुझे वो भी चैन की नींद देगी…!!

:-प्रथमेष 🖋

बदलाव

लोग बदले , हालात बदले…
मगर मेरे जीने के अंदाज़ न बदले…

कहावत को हकिकत में बदला…
ज़माने को आईना दिखाया मगर कभी खुदका हुलिया न बदला…

मंज़िल भी नहीं बदली , रास्ता भी न बदला…
हम चलने वाले ने अपना जज़्बा भी न बदला…

था शौक ए कदर इस कदर ज़िंदगी का मुझ पर…
के अरसो से मंज़िल भी न पाई मगर मैने भी वो रास्ता न बदला…!!

:-प्रथमेष🖋

रात 🌃

ये रातें बहुत कुछ बता देती है…
इसी लिए मुझे छोड़ सभी को सुला देती है…

चाँद सितारों से रोज़ वो महफिल सजती है…
कुछ अनकही बातें भी बेख़ौफ लफ्ज़ो में निकलने लगती है…

कई लोगों के गिला शिकवा समेट कर अपने साथ ले जाती है…
जाते जाते नींद में सुबह के हसीन सपने दिखा जाती है…

सभी को वो अपने काले अंधकार से डरा देती है…
मगर मुझे वो जीने के अंदाज़ सीखा देती है… 🌑!!

:-प्रथमेष🖋

ज़रूरी है या नहीं…

कामयाबी हर किसी को पचती नहीं…
हकिकत छुप जाती है,मगर बदलती नहीं…

कोई रोके तो थम जाऊ , खड़ा हो तो झुक जाऊ…
क्या करू ऐसा तो मेरी फ़ितरत में नहीं…

रोकने वाले हज़ार हाथ को काटना के लिए शाहजहाँ बनना तो मजबूरी है…
सहारा देने वालो के लिए एकलव्य बनना भी ज़रूरी है…

ये ज़रूरी तो नहीं की सच्चाई सभी को बताई जाए…
पीने लायक तो ज़हर भी है,मगर ये नहीं की उसे भी पीया जाए…

:-प्रथमेष🖋

पैसा…

पैसे से अगर दुनिया चलती…
तो हर रोज हर पल तकदीर बदलती…

कई लोगों ने ईमान तोल दिया पैसों पर…
मैने उन्हें छोड़ दिया उसी वक्त, उसी हाल पर…

भरी होगी उनकी जेब पैसों से…
मेरा नसीब भरा है , मेरे दोस्तों से…

कहाँ ले जायेंगे उस पैसे के गुरूर को…
न कफन में जेब है, न कब्र में अलमारी…!!

:-प्रथमेष 🖋

हालात…

दिन दिन करके ज़िंदगी धक रही है…
मुँह पर कपड़ा डाल दिल में घुटन सी हो रही है…

हालातों के शिकंजे में इस कदर आ खड़े है…
बेचैनी के मानो पहरे लग रहे है…

सवाँरा हुआ कल पीछे खड़ा था, मगर हम तबाही का मंज़र चुन रहे है…
लगता है, कायनात से रोज़ बिछड़े पल की भीख मांग रहे है…

सब ठीक होने की आस में हर वक्त से लड़ रहे है…
जीवन की इस लड़ाई में सब अकेले से पड़ रहे है…!!

:-प्रथमेष 🖋

ये वक्त भी गुज़र जाएगा…

ये वक्त भी गुज़र जाएगा…
हिम्मत रख तू भी उभर कर आएगा…

अच्छा हो या बुरा समय बितता ज़रूर है…
जो लड़ गया वो जीतता ज़रूर है…

अपनी मंज़िल को पाने की चाहत तो बड़ा…
रास्ते सर झुकाऐ खड़े होंगे , तू कदम तो बड़ा…

हौसला रख तू भी विजय पाएगा…
तेरा नाम भी रोशन हो जाएगा…

ये युद्ध है कुछ तो तेरा भी जाएगा…
संयम रख तेरा भी दौर आएगा…!!


:- प्रथमेष🖋

हार का वो सफर..🛤

गुज़रती हवा में वो खुशबू नहीं थी…
ज़िंदगी गुमसुम सी बस एक मोड़ पर खड़ी थी…

झूठी मुस्कान उस चेहरे पर ज़रुर आती थी…
मगर दिल में अजीब सी मायूसी फिर से छा जाती थी…

नकामयाबी का वो मंज़र इस कदर आ खड़ा था…
उस दौर में हार से भी हारा हुआ लगने लगा था…

मेरे हौसले के वो अंगारे अभी बुझे नहीं थे…
मैने मंज़िल के वो रास्ते अभी भूले नहीं थे…

हार की उस आँच में जीत के जज़्बे उबल रहे थे…
मेरे वक्त से लड़ने पर कहावत और नतीजे दोनों बदल रहे थे..!!


:-प्रथमेष 🖋

LIFE A RIDE

Stronger is not the boss , you have to just identify the odds…

A lesson from past , can be your success chart…

Talent and hardwork is forever , and the result is only a piece of paper…

Decide the future and light up your minds , because every new day is a dream of last night…

Easy life has boring and a smooth ride , Challenging paths will draft a amazing story for your child …

:-PRATHMESH 🖋

CHANGE🔄REVERT

Never change the behavior , change the atmosphere …

The change may affect the well wishers , so sort out the ditchers…

Changes might be good with time , but replacements have high cost as fine…

The dynamic world has an unpredictable mind , just be happy with the one’s and leave the rest behind…

Favourable changes allows to relax at night ,
Unless you devote your nights to the useless fights…

It’s not too late to be again at your stable stage , just recall the memories in that happy phase…

It’s hard , but you can have some faith…❤

:-PRATHMESH🖋

ALONE…

Alone at 7 , alone at 9…
Alone at AM , alone at night…
Keep aside the breakup time…
Happy dreams at mid night…

Enjoy the day of Valentine…
Give a house to stable mind…
Think about the way to fight…
Work upon your strength and might…

Alone at hard , alone at fine…
Just get up and start your ride.

:- Prathmesh 🖋

HARD & HOPE

Hard times make u feel low , but destiny is still a dream wake up and just flow…

Never loose your hope , as it creates your own scope…

Never judge a person in your life , to love him you don’t have a time…

Discard the past , renovate the present because happy faces are only for seconds…

People who stay last long , make them forever an on…

:-PRATHMESH🖋

ज़िंदगी दो पल की..

न जीने की ख्वाहिश , न मरने का इरादा… ऐसे ही बीत जाता ये जीवन सारा… अपनो को खोकर , गैरो को सँवारना… इसे ही कहते है इंसानियत को मारना… खून पसीना बहाकर ज़िंदगी गुज़ारना… उसे कहना बस हिम्मत मत हारना… आँखें खोलकर हसीन सपने सजाना… इंसान हो फरिश्ता नहीं,वापस लौटकर आजाना !! :-प्रथमेष 🖋

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