गुज़रती हवा में वो खुशबू नहीं थी…
ज़िंदगी गुमसुम सी बस एक मोड़ पर खड़ी थी…
झूठी मुस्कान उस चेहरे पर ज़रुर आती थी…
मगर दिल में अजीब सी मायूसी फिर से छा जाती थी…
नकामयाबी का वो मंज़र इस कदर आ खड़ा था…
उस दौर में हार से भी हारा हुआ लगने लगा था…
मेरे हौसले के वो अंगारे अभी बुझे नहीं थे…
मैने मंज़िल के वो रास्ते अभी भूले नहीं थे…
हार की उस आँच में जीत के जज़्बे उबल रहे थे…
मेरे वक्त से लड़ने पर कहावत और नतीजे दोनों बदल रहे थे..!!
:-प्रथमेष 🖋
हार का वो सफर..🛤
Best.
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Thank u ❤
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Beautifully written
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Thank u ❤ keep supporting💯
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Heart touching lines….keep it up 👍👍
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Thank u ❤…keep supporting💯
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Wonderful!!♡
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Thank u ❤…keep supporting💯
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