एक बूँद..!!

जब गिरी बूँद छत से, तो आशियाने भीग गए…थका जब सफर ए ज़िंदगी में, मेरी नाकामयाबी के इश्तिहार छप गए… जब की रोशन एक चिंगारी खुदमें, हज़ारों तूफान उसे फूँकने आ गए…हुआ खामोश मैं कुछ पल के लिए, मेरी चुप्पी के जनाज़े निकल गए… और फिर जब गिरी बूँद आँखों से, सारे जज़्बात खारे पड़Continue reading “एक बूँद..!!”

फुर्सत

तुम कहो तो फुर्सत से आता हूं…आते वक्त फुर्सत से फुर्सत वाला वक्त ले आता हूं… गिले-शिकवे तो बहुत होंगे महफिल में…तुम कहो तो थोड़ा सा सुकून ले आता हूं… भगदड़ सी मची है जिंदगी में…तुम कहो तो थोड़ी फुर्सत खरीद ले आता हूं…!! :-प्रथमेष🖋

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